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Nepal Flood Disaster: नेपाल में बाढ़ का कहर, दो बेटियों और पत्नी को खोने वाला शख्स बोला-परिवार की लाशें तक नहीं मिलीं

- Photo by : SOCIAL MEDIA

नेपाल  Published by: Shubhi Shikha Nayal , Date: 01/09/2026 04:33:01 pm Share:
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  • Published by: Shubhi Shikha Nayal ,
  • Date:
  • 01/09/2026 04:33:01 pm
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संक्षेप

नेपाल: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बड़ी संख्या में परिवारों को प्रभावित किया है।

विस्तार

नेपाल: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बड़ी संख्या में परिवारों को प्रभावित किया है। बाढ़ के पानी ने कई घरों, गांवों और लोगों की जिंदगी को तबाह कर दिया है। बड़ी संख्या में प्रभावित लोग राहत और होल्डिंग सेंटरों में रहने को मजबूर हैं। बच्चों के पास पढ़ाई का सामान नहीं है, जबकि महिलाओं और नवजात बच्चों वाले परिवारों को भोजन और स्वास्थ्य से जुडी समस्याओं' का सामना करना पड़ रहा हैं 

बाढ़ में पत्नी और दो बेटियों की हुई मौत

जानकारी के अनुसार 27 वर्षीय बाम बहादुर घले ने बाढ़ में अपनी पत्नी सोम माया और दो बेटियों बिनुसा और सुनीता को खो दिया हैं। घटना के समय वह घर पर मौजूद नहीं थे, इसलिए उनकी जान बच गई। द काठमांडू पोस्ट से बातचीत में उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि अब उनका परिवार पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि घर और गांव के साथ उनके कई रिश्तेदार भी बाढ़ में बह गए, लेकिन अभी तक परिजनों के शव तक नहीं मिल सके हैं। बाम बहादुर ने कहा कि कई बार उनके मन में यह विचार आता है कि अगर वह भी परिवार के साथ होते तो शायद आज इस दर्द को महसूस नहीं करना पड़ता।

2015 के भूकंप से बचने के बाद अब बाढ़ ने छीना परिवार

बताया जा रहा हैं की 42 वर्षीय छेगु लामा की जिंदगी भी प्राकृतिक आपदा से दोबारा प्रभावित हुई है। वह वर्ष 2015 में आए विनाशकारी भूकंप से बच गए थे। इसके बाद उनका परिवार खल्टे नदी के किनारे रहने लगा था। बताया गया हैं कि सरकार ने इस इलाके को असुरक्षित बताते हुए परिवारों को सुरक्षित स्थान पर भेजना का भरोसा दिलाया था, लेकिन उन्हें समय पर दूसरी जगह नहीं मिल सकी। अब बाढ़ की आपदा में लामा के परिवार के कई सदस्य लापता हैं। इनमें उनकी बहन कैसांग बुटी, दो जीजा, पिता सोनम, मां योसोंग माया, छोटा भाई उज्जेन सिंह तामांग और भतीजा दिनेश शामिल हैं। फिलहाल लामा लहरेपौवा स्थित एक होल्डिंग सेंटर में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि भूकंप के बाद भी उन्होंने इसी क्षेत्र में जिंदगी दोबारा शुरू की थी, लेकिन बाढ़ ने उनके परिवार और जीवन की बची हुई उम्मीदें भी छीन लीं।

करीब एक हजार घर प्रभावित

कलिका गांवपालिका-3 के सामाजिक कार्यकर्ता विश्वास नेपाली के अनुसार उत्तरागया गांवपालिका के विभिन्न वार्डों में करीब एक हजार घर बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। माइलुंग के वार्ड-1, पहिरेबेसी के वार्ड-4 और खल्टे के वार्ड-5 में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। कई परिवारों को अपना सामान तक निकालने का मौका नहीं मिला और उन्हें केवल अपनी जान बचाकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई परिवारों के पास कपड़े और बच्चों के लिए किताब-कॉपी तक नहीं बची हैं। प्रभावित लोगों को आश्रय देने के लिए कुछ स्कूलों को अस्थायी राहत शिविरों में बदल दिया गया है। फिलहाल पांच होल्डिंग सेंटर जारी  किए जा रहे हैं, जहां बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है। राहत शिविरों में रह रहे लोगों को भोजन, कपड़े और अन्य जरूरी सामान की आवश्यकता है।

लंबे समय तक राहत शिविरों में रहने से स्वास्थ्य संकट का खतरा

विश्वास नेपाली ने बताया कि स्थानीय प्रशासन अभी भी राहत एवं बचाव कार्य के साथ-साथ शवों की तलाश में जुटा हुआ है। कुछ क्षेत्रों में सरकारी सहायता पहुंची है, जबकि कई जगह सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की ओर से उपलब्ध कराई गई राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई हैं कि यदि प्रभावित लोगों को लंबे समय तक अस्थायी शिविरों में रहना पड़ा तो स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में राहत और बचाव के बाद प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी ठिकानो की व्यवस्था करना जरूरी होगा, ताकि वे सुरक्षित माहौल में दोबारा अपनी जिंदगी शुरू कर सकें।