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Drug Trafficking: नशे के कारोबारियों पर हुआ बड़ा एक्शन, अवैध कब्जे वाले पक्के मकान हुए ध्वस्त

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राजस्थान  Published by: md anish , Date: 05/06/2026 01:26:55 pm Share:
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  • 05/06/2026 01:26:55 pm
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संक्षेप

राजस्थान: कोटा में नशे के कारोबार करने वाले अपराधियों के खिलाफ कोटा ग्रामीण पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपी मां-बेटे अवैध अतिक्रमण को बुलडोजर की सहायता से मुक्त कराया है।

विस्तार

राजस्थान: कोटा में नशे के कारोबार करने वाले अपराधियों के खिलाफ कोटा ग्रामीण पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपी मां-बेटे अवैध अतिक्रमण को बुलडोजर की सहायता से मुक्त कराया है। करीब डेढ़ बीघा सरकारी भूमि को सीमलिया थाना क्षेत्र में प्रशासन और सीएडी विभाग की संयुक्त कार्रवाई में अतिक्रमण मुक्त कराते हुए दो पक्के मकान गिराए है। जानिए पूरी खबर। 


नशे के कारोबारियों पर बड़ी कार्रवाई, अवैध मकान ढहाए गए

जानकारी के मुताबिक, ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर ने बताया कि जिले को नशामुक्त बनाने के लिए पुलिस नशे के कारोबार और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों पर लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी अभियान के तहत सीमलिया थाना क्षेत्र के कल्याणपुरा गांव की सुगना बाई और उसके बेटे धीरज के खिलाफ कार्रवाई की गई। जांच में पता चला है की दोनों ने सीएडी विभाग की सरकारी जमीं पर अवैध कब्जा कर रखा था वहां दो पक्के माकन बना लिए थे। इसके बाद पुलिस, प्रसाशन और सीएडी विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर बुलडोज़र से दोनों माकन को ध्वस्त कर दिया और जमीं को अतिक्रमण मुक्त कराया। अधिकारियों के अनुसार मुक्त कराई गई जमीन और तोड़े गए निर्माण की कुल कीमत करीब 25 लाख रुपये है।  पुलिस ने कहा कि नशे के कारोबारियों और सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

डोडा पोस्त तस्करी मामले में 20 साल की हुई सजा

कोटा में छह साल पुराने डोडा पोस्त तस्करी के मामले में विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने आरोपी कालू गुर्जर को 20 साल सख्त कारावास और 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जानकारी के अनुसार, 27 जून 2020 को अनंतपुरा थाना पुलिस ने सूचना के आधार पर रानपुर रीको क्षेत्र के एक गोदाम में छापा मारकर 24 कट्टों में भरा 360 किलो डोडा पोस्त बरामद किया था। मामले में कालू गुर्जर और हरिशंकर मीणा को गिरफ्तार किया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 27 गवाह और 178 दस्तावेज न्यायालय में पेश किए। सभी साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने कालू गुर्जर को दोषी मानते हुए 20 साल की सजा और 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं, पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण हरिशंकर मीणा को बरी कर दिया गया। हालांकि पुलिस अभी भी मामले की जांच में जुटी हुई है।