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Government Rice Diversion Scam: गरीबों के चावल के आवंटन में हुआ घोटाला, 62 हजार MT की योजना में CBI ने दर्ज की FIR
- Photo by : social media
संक्षेप
दिल्ली: दिल्ली में गरीबों, दिहाड़ी मजदूरों और प्रवासी श्रमिकों को सस्ता चावल उपलब्ध कराने के लिए किए गए सरकारी आवंटन में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है।
विस्तार
दिल्ली: दिल्ली में गरीबों, दिहाड़ी मजदूरों और प्रवासी श्रमिकों को सस्ता चावल उपलब्ध कराने के लिए किए गए सरकारी आवंटन में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI ने भारतीय खाद्य निगम FCI के दिल्ली रीजन के अधिकारियों, नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चरल मार्केटिंग कॉरपोरेशन NERAMAC के अधिकारियों, निजी कारोबारियों और कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। शुरुआती जांच में FCI को करीब 28.87 करोड़ रुपये के अनुमानित नुकसान की बात सामने आई है। मामला ओपन मार्केट सेल स्कीम (डोमेस्टिक) 2025-26 के तहत चावल के आवंटन से जुड़ा है। CBI के अनुसार, नियमों को दरकिनार कर NERAMAC को करीब 62,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया गया। इसमें से लगभग 50,645 मीट्रिक टन चावल उठाया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और सरकारी चावल का लाभ जरूरतमंद लोगों के बजाय निजी कारोबारियों को पहुंचा। FIR के मुताबिक, 7 जनवरी को NERAMAC के तत्कालीन AGM एग्री-बिजनेस ने दिल्ली सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री को पत्र लिखकर आम लोगों, दिहाड़ी मजदूरों, प्रवासी श्रमिकों और बिना राशन कार्ड वाले लोगों के लिए हर सप्ताह 31,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित करने का अनुरोध किया था। इसके बाद 25 मार्च को NERAMAC ने तीन निजी कंपनियों को चैनल पार्टनर बनाया। CBI का आरोप है कि इन कंपनियों के साथ किए गए समझौतों की आवश्यक कानूनी जांच नहीं कराई गई। समझौतों में NERAMAC को OMSS के तहत चावल खरीदने और वितरित करने का अधिकार बताया गया, जबकि FCI की ओर से ऐसा अधिकार दिए जाने का आरोप नहीं है। जांच में FCI के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि 8 अप्रैल को दिल्ली सरकार का प्रस्ताव FCI पहुंचने के बाद तत्कालीन GM दिल्ली रीजन ने पूरी पात्रता जांच होने से पहले ही चावल और भुगतान से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। AGM सेल्स और मैनेजर सेल्स पर भी पात्रता की जांच किए बिना प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आरोप है। CBI की शुरुआती जांच के अनुसार, आवंटित चावल का इस्तेमाल जरूरतमंदों तक पहुंचाने के बजाय निजी कारोबारियों के माध्यम से किया गया। आरोप है कि कारोबारियों ने NERAMAC के खाते में करीब 23.25 रुपये प्रति किलो की राशि जमा की और इसके बदले 64 पैसे से 2.50 रुपये प्रति किलो तक कमीशन दिया गया। इसके बाद चावल को अन्य कारोबारियों को बेचकर मुनाफा कमाने का आरोप है। जांच एजेंसी को यह भी शक है कि जनता के बीच चावल वितरण किए जाने का रिकॉर्ड दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी तारीखवार चार्ट तैयार किए गए। मामले में अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। CBI अब आवंटन, उठान, भुगतान, चैनल पार्टनर और कथित वितरण से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।