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हरियाणा: प्रमाण-पत्रों से ‘चमार’ शब्द हटाने के प्रस्ताव के विरोध में 12 सितंबर को करनाल में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन
- Photo by : social media
संक्षेप
हरियाणा: करनाल सरकार द्वारा सरकारी प्रमाण-पत्रों से ‘चमार’ शब्द हटाकर ‘मेघवाल’ दर्ज करने की सिफारिश के विरोध में 12 सितंबर 2026 को करनाल के फवारा पार्क में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
विस्तार
हरियाणा: करनाल सरकार द्वारा सरकारी प्रमाण-पत्रों से ‘चमार’ शब्द हटाकर ‘मेघवाल’ दर्ज करने की सिफारिश के विरोध में 12 सितंबर 2026 को करनाल के फवारा पार्क में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन को लेकर गुरु रविदास मंदिर में समाज के बुद्धिजीवियों, सामाजिक प्रतिनिधियों और युवाओं की बैठक हुई, जिसमें सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए आगे की रणनीति तैयार की गई। बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने बताया कि 23 अगस्त को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रेवाड़ी के बावल में आयोजित एक कार्यक्रम में सरकारी प्रमाण-पत्रों से ‘चमार’ शब्द हटाकर ‘मेघवाल’ दर्ज करने संबंधी सिफारिश केंद्र सरकार को भेजने की बात कही थी। इसके बाद समाज के लोगों में इस प्रस्ताव को लेकर विरोध और नाराजगी सामने आई है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रस्ताव के विरोध में 12 सितंबर, शनिवार को फवारा पार्क में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन का उद्देश्य समाज की ऐतिहासिक पहचान, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना है। वक्ताओं ने कहा कि ‘चमार’ शब्द समाज के इतिहास, संघर्ष, पहचान और स्वाभिमान से जुड़ा हुआ है। उनका कहना था कि किसी समुदाय की पहचान से संबंधित शब्द में बदलाव का निर्णय समाज की भावनाओं और सहमति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। बैठक में प्रदेशभर के समाज के लोगों, सामाजिक संगठनों, प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं से 12 सितंबर को अधिक से अधिक संख्या में करनाल पहुंचने की अपील की गई। आयोजकों ने सम्मेलन को शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपनी मांग सरकार के समक्ष रखने की बात कही। बैठक में एडवोकेट सोनिया तंवर, एडवोकेट अमित तंवर, एडवोकेट मान सिंह, एडवोकेट रूबी, बयान चौधरी, उदय सिंह मुंडे, सुरेंद्र प्योंत, प्रदीप गुलशन, रोहतास, कुलदीप, संजीव, कृष्ण, सुनील कुमार और चंदेश सहित कई सामाजिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।