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Prison Bribery: तिहाड़ जेल में रिश्वतखोरी पर हुआ बड़ा खुलासा, 6 वार्डर समेत 11 आरोपी हुए गिरफ्तार

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दिल्ली  Published by: Shikha , Date: 17/07/2026 05:53:12 pm Share:
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  • 17/07/2026 05:53:12 pm
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संक्षेप

दिल्ली: दिल्ली की जेलों में कथित रूप से चल रहे रिश्वतखोरी और अवैध वसूली के संगठित नेटवर्क का दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने बड़ा खुलासा किया है।

विस्तार

दिल्ली: दिल्ली की जेलों में कथित रूप से चल रहे रिश्वतखोरी और अवैध वसूली के संगठित नेटवर्क का दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक सहायक अधीक्षक, छह जेल वार्डर, दो वकील और दो निजी व्यक्ति शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, यह गिरोह अंडर ट्रायल कैदियों के परिजनों से सुरक्षा, बेहतर सुविधाएं और विशेष व्यवहार दिलाने का लालच देकर मोटी रकम वसूलता था। एसीबी प्रमुख एवं संयुक्त पुलिस आयुक्त (जॉइंट सीपी) विक्रमजीत सिंह ने बताया कि इस मामले की जांच 9 फरवरी को प्राप्त एक शिकायत के बाद शुरू हुई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि रोहिणी जेल में बंद उसके पिता और भाई की सुरक्षा तथा सुविधाओं के नाम पर उससे लगातार रिश्वत की मांग की जा रही थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसीबी ने गुप्त जांच शुरू की और ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई।

कार्रवाई के दौरान एसीबी ने एक लाख रुपये की रिश्वत बरामद की और मामले में एफआईआर दर्ज की। शुरुआती जांच में सामने आया कि रोहिणी जेल के वार्डर दिनेश डबास, पंकज कुमार और रवि कुमार, तिहाड़ जेल के हेड वार्डर जोगेंद्र, फरीदाबाद निवासी अधिवक्ता मनीष तथा दिल्ली निवासी आशीष राणा मिलकर इस अवैध वसूली के नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की गई। जांच के दौरान एसीबी ने आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन का विस्तृत विश्लेषण किया। जांच में पता चला कि कैदियों के परिजनों से वसूली गई रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती थी। इसके बाद नकदी निकालकर गिरोह के सदस्यों के बीच बांट दी जाती थी। मनी ट्रेल और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया गया, जिसके बाद पांच अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी की गई।

बाद में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रोहिणी जेल के सहायक अधीक्षक सुनील कुमार, हेड वार्डर योगेश, वार्डर जगबीर, उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी अधिवक्ता हरेंद्र बंसल तथा दिल्ली निवासी विप्लव खारी शामिल हैं। एसीबी के अनुसार, अब तक गिरफ्तार 11 लोगों में एक सहायक अधीक्षक, छह जेल वार्डर, दो अधिवक्ता और दो निजी व्यक्ति शामिल हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह नेटवर्क कई स्तरों पर सक्रिय था। एसीबी प्रमुख विक्रमजीत सिंह ने बताया कि जांच अभी जारी है और एजेंसी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने, अवैध लेनदेन की पूरी मनी ट्रेल खंगालने तथा साजिश के पूरे दायरे का पता लगाने में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी नए तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई को दिल्ली की जेल व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
 

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